–दलित-पिछड़े मुसलमानों के सशक्तिकरण की लड़ाई तेज करने पर बनी सहमति, सैकड़ों की मौजूदगी में लोगों ने सरकार को चेताया
संतकबीरनगर । ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के तत्वावधान में मंगलवार को खलीलाबाद के एक निजी होटल में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में पसमांदा एवं दलित शामिल हुए। कार्यक्रम में “जितनी जिसकी हिस्सेदारी, उतनी उसकी भागीदारी” का नारा गूंजता रहा।
बैठक की शुरुआत हाफिज मोहम्मद असलम सुबहानी ने कुरान पाठ से की, इसके बाद नात पेश की गई और राष्ट्रगान हुआ। मुख्य अतिथि बुनकर नेता व समाजवादी पार्टी की कार्यकारिणी समिति के प्रदेश सदस्य मोहम्मद इशाक अंसारी ने कहा कि दलित और पिछड़े मुसलमानों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए राजनीतिक भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लागू भारतीय संविधान में वंचित वर्गों के उत्थान के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया, लेकिन अनुच्छेद 341 में धर्म आधारित प्रतिबंध के कारण मुसलमानों और ईसाइयों के कई वर्ग अब भी वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे कई पीढ़ियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अंसारी ने कहा कि सच्चर कमेटी (2006) और रंगनाथ मिश्रा आयोग (2007) की रिपोर्टों में भी पिछड़े मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति कमजोर बताई गई है। शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उनकी भागीदारी अपेक्षा से काफी कम है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े मुसलमानों की आबादी 80-85 प्रतिशत होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने उलेमा से अपील की कि वे समाज को जागरूक करें और लोकतांत्रिक तरीके से अधिकारों के लिए संघर्ष करने को प्रेरित करें। ऑल इंडिया बैकवर्ड उलेमा बोर्ड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना रेहान रजा अंसारी ने कहा कि उलेमा को केवल मस्जिदों और मदरसों तक सीमित रखना ऐतिहासिक अन्याय है और उन्हें सामाजिक मुद्दों में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधियों ने सरकार को ज्ञापन भेजकर आबादी के अनुपात में राजनीतिक व सामाजिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
