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बीमारी पर नही ली सुधि, शव हथियाने के लिए शुरू हुई वर्दी की परिक्रमा

महुली पुलिस को मिली लूट करके बुजुर्ग विधवा के हत्या की सूचना निकली झूठी

– विधवा के मौत की सूचना पर पहुंचे भान्जो और भतीजों ने दवा कराने वाली पड़ोसी पर ही लगा डाला आरोप

बदलते दौर में रिश्ते और इंसानियत दौलत की चौखट पर मत्था टेकने को विवश है। समाज के इस बदलते स्वरूप का भविष्य बेहद खौफनाक नजर आ रहा है। इसकी बानगी बुधवार को कबीर की सरजमीं पर स्थित महुली थाना परिसर में देखने को मिली। जब एक बुजुर्ग विधवा महिला की लूट के बाद हत्या करने की सूचना पर महुली पुलिस ने सूचनाकर्ता के साथ मामले से जुड़े सभी पक्षों को थाने में तलब किया। पुलिस क्षेत्राधिकारी की मौजूदगी में जब पुलिसिया तफ्तीश शुरू हुई तो समाज के बदलते स्वरूप को देख हर कोई दंग रह गया।
बुधवार की सुबह डायल 112 पर सूचना फ्लैश हुई कि महुली कस्बे में लूट के बाद एक महिला की हत्या कर दी गई। आईपीसी के सबसे जघन्य अपराध की सूचना पर उच्चाधिकारियों के साथ ही महुली पुलिस भी त्वरित हरकत में आ गई। दी गई सूचना के आधार पर जब थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पांडेय मय फोर्स घटना स्थल पर पहुंचे तो मजरा देख सूचनाकर्ता सहित मामले से जुड़े सभी पक्षों को थाने पर तलब करते हुए मृतका के शव को अपने कब्जे में ले लिया। थाने पर पहुंचे सीओ धनघटा अभय नाथ मिश्र की मौजूदगी में जब सच सामने आया तो पुलिस में भौचक रह गई। थाना परिसर में चले घटनाक्रम की माने तो महुली कस्बा निवासी 85 वर्षीय चंद्रमुखी पत्नी गोपाल द्विवेदी का गोरखपुर स्थित मेडिकल कॉलेज में निधन हो गया था। ग्रामीणों की चंद्रमुखी के पति गोपाल की मृत्यु लगभग 15 साल पूर्व हो गई थी। इस दंपति के पास कोई संतान नहीं थी। सूत्रों की माने तो चंद्रमुखी के नाम से करोड़ों की संपत्ति भी है। ग्रामीणों की माने तो उनकी पड़ोसी स्नेहलता और पड़ोस की एक और महिला तभी से उनकी सेवा करते आ रहे हैं। थाने में मौजूद स्नेहलता के पति और दामाद का दावा है कि पिछले कई सालों से चंद्रमुखी की तबीयत खराब होने पर उनका इलाज कराया जाता रहा है। घर पर अकेली रह रही चंद्रमुखी की इस बार भी मंगलवार की दोपहर तबियत खराब हुई तो स्नेहलता उन्हे लेकर सीएचसी नाथनगर होते हुए जिला अस्पताल तक इलाज के लिए लेकर पहुंची। चिकित्सकों के रेफर करने पर स्नेहलता चंद्रमुखी को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे जहां इलाज के दौरान उनके निधन का दावा किया जा रहा है। दावा है कि देर रात चंद्रमुखी का शव लेकर स्नेहलता महुली स्थित उनके पैतृक आवास पहुंची और सुबह उन्होंने मृतका के मुंबई में स्थित मायके के भतीजे को फोन करके उनके निधन की सूचना दिया। उसके बाद कोतवाली थाना क्षेत्र के तेनुआ माफी निवासी मृतका के भांजे भास्कर ओझा ने डायल 112 पर लूट के बाद अपने मामी की हत्या कर दिए जाने की सूचना फ्लैश हुई। सवाल यह है कि जब मृतका बीमार हुई तो उनके इलाज के लिए न तो उनका भतीजा पहुंचा और न ही भांजा पहुंचा। पड़ोसी महिला ने इंसानियत दिखाई तो उसी पर लूट और हत्या का आरोप लगा दिया गया। मजे की बात यह है कि मृतका के ससुराल के पट्टीदारों ने हिंदू रीति रिवाज के अनुसार दाह संस्कार करने का दावा पेश किया तो मृतका के भांजों ने बिना किसी लाभ के स्वार्थ की शर्त पर ही दाह संस्कार की इजाजत दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए तो भेज दिया लेकिन मामले में कई मानवीय सवाल पीछे छूट गए। मृतका के भांजों का यह दावा कि पड़ोसी स्नेहलता की मानवता किसी आर्थिक लाभ के उद्देश्य को हासिल करने की थी? यह सही है या फिर 85 वर्ष की असहाय, अनाथ महिला की सेवा और दावा इलाज से दूर रहने वाले भांजे भतीजे उनकी मौत के बाद खुद को उनकी करोड़ों की संपत्ति पर दावेदारी की नियत से मानवता दिखाने वाली पड़ोसी महिला को ही खलनायक बनाने में जुटे हैं? मामला तो अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिका है लेकिन मानवीय संवेदना, संपत्ति की चाहत और गंभीर अपराध को पुलिस की माफीनामी क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

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