गो-वंशों की देखरेख एवं निरीक्षण में लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी द्वारा खंड विकास अधिकारी पौली, ग्राम पंचायत सचिव मझौरा, एडीओ (पंचायत) एवं संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही एवं प्रतिकूल प्रविष्टि, नोडल अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि एवं स्पष्टीकरण तथा ग्राम पंचायत प्रशासक के निलंबन की कार्यवाही के निर्देश।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी द्वारा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी व संबंधित खंड विकास अधिकारी को गो-आश्रय स्थलों का रूटीन निरीक्षण करने हेतु निर्देशित किया गया।
संत कबीर नगर जिलाधिकारी आलोक कुमार द्वारा गो-आश्रय स्थलों के निरीक्षण के क्रम में नाथनगर विकासखंड के गो-आश्रय स्थल कठैचा व पौली विकासखंड के गो-आश्रय स्थल मझौरा का स्थलीय निरीक्षण कर गोवंशों के संरक्षण व गौशालाओं के सुचारू संचालन के संबंध में विभिन्न बिंदुओं का जायजा लिया गया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी द्वारा गो-आश्रय स्थल कठैचा का स्थलीय निरीक्षण के दौरान 73 गोवंश संरक्षित पाए गए। गोवंशों की ईयर टैगिंग की गई थी।
गो-आश्रय स्थल में दो केयरटेकर कार्यरत हैं जिसमें मौके पर एक केयरटेकर उपस्थित पाए गए, दूसरे के संबंध में बताया गया कि परिवार में कैजुअल्टी के कारण वह आज अनुपस्थित हैं।
निरीक्षण के दौरान गोवंशों हेतु पेयजल एवं चारा की उपलब्धता पाई गई, मौके पर 7.5 बोरी दाना उपलब्ध पाया गया। केयर टेकरों को मानदेय का भुगतान मिल रहा है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गोवंशों हेतु टीन शेड के बगल में एक-डेढ़ फीट मिट्टी डालकर खड़ंजा लगाने के निर्देश दिए।
गो-आश्रय स्थल मझौरा का निरीक्षण के दौरान गौशाला बंद पाया गया मौके पर कोई भी केयरटेकर उपस्थित नहीं पाया गया जबकि कुल 05 केयरटेकर कार्यरत हैं।
जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण की सूचना मिलने पर केयर टेकर द्वारा मौके पर पहुंचकर गौ-शाला खोला गया। इस पर जिलाधिकारी द्वारा कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देशित किया गया कि कम से कम दो केयर देकर गो-आश्रय स्थल पर देखरेख हेतु हमेशा उपलब्ध रहें।
गो-आश्रय स्थल में कुल 199 गोवंश संरक्षित पाए गए। बताया गया कि यह गो-आश्रय स्थल कल ही एक एनजीओ को हैंड ओवर किया गया है जिसकी देखरेख में इसको संचालित किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गोवंशों हेतु बुआई किए गए हरे चारे को बाहरी जानवर नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिस पर जिलाधिकारी ने उसे उचित तरीके से सुरक्षित करने के हेतु निर्देशित किया। भूसा, चारा व दाना की उपलब्धता के बावजूद भी नाद में केवल भूसा ही पाया गया, जिलाधिकारी ने गोवंशों को संतुलित चारा खिलाएं जाने हेतु निर्देशित किया।
जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान गो-आश्रय स्थल मझौरा में तीन गोवंश मृत पाए गए, बताया गया कि आज ही गो-वंशों की मृत्यु हुई है। जिस पर जिलाधिकारी द्वारा तत्काल मृत गोवंशो को दफनाए जाने/अंतिम संस्कार किए जाने हेतु संबंधितों को निर्देशित किया गया।
गो-आश्रय स्थल मझौरा में व्यवस्थाएं/सुविधाओं में अनियमितता पाए जाने व गो-वंशों की देखरेख एवं निरीक्षण में लापरवाही पाए जाने को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी पौली, ग्राम पंचायत सचिव मझौरा, एडीओ (पंचायत) एवं संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी को विभागीय कार्यवाही एवं प्रतिकूल प्रविष्टि एवं नोडल अधिकारी/डीसी एनआरएलएम को प्रतिकूल प्रविष्टि एवं स्पष्टीकरण देने हेतु देने हेतु मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया। ग्राम पंचायत प्रशासक के निलंबन की कार्यवाही हेतु मुख्य विकास अधिकारी एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया।
जिलाधिकारी द्वारा गो-आश्रय स्थलों के शिथिल पर्यवेक्षण पर मुख्य विकास अधिकारी को चेतावनी एवं स्पष्टीकरण देने हेतु निर्देशित किया गया।
